मंगलवार, 16 जून 2020

जामवंत (Jambavan)

|| जय सिया राम || 

|| जामवंत || 
 
जांबवंत जी का जन्म ब्रह्मा जी से हुआ था उनके पत्नी का नाम जयवंती था। इनकी युवावस्था में  भगवन त्रिविक्रम वामन जी का अवतार सतयुग में हुआ। तब वामन भगवन राजा बलि के पास तीन पग भिक्षा मांगने गए और बलि तैयार भी हो गया, भगवान ने अपना स्वरुप बढ़ाया और भगवान ने देख़ते ही देखते दो पग से ही पूरा ब्रह्मण्ड नाप लिया  | अब भगवान ने बलि को बांधने लगे तब जामवंत जी ने बलि को बांधते हुए प्रभु की सात प्रदिक्षणा कर ली और तब तक प्रभु पूरा बलि को पूरा बांध भी नहीं पाए थे। जब सुग्रीव जी, बलि के डर से ऋषिमुख गिरी पहाड़ पर था तब भी जामवंत जी उनके साथ थे। जब राम जी बाली को मारने जाने वाले थे तब  जामवंत जी ने ही बताया था की इन सात पेड़ो को एक बाण से भेदेगा वही बाली को मारेगा और ऐसा ही हुआ। एक कथा यह भी हे वानर सेना समुद्र तट पर खड़ी सोच रही थी  कैसे लंका तक जाया जाए | सभी ने कहा जामवंत जी सबसे बड़े हैं वही कोई उपाए करें , तब उन्होंने कहा की अब में वृद्ध हो गया हूँ तब भी समुद्र पार करके लंका जा सकता हूँ लेकिन वापिस आने में संदेह है | नीति निपुण जामवंत ने कहा की अंगद का जाना सही नहीं क्यूंकि वो किष्किन्दा के युवराज हैं | लेकिन बजरंग बलि को उनकी शक्तियाँ याद दिलाई जाएं तो वह निसंदेह लंका जाकर सीता जी का पता लगाकर सकुशल वापिस आ सकते हैं | फिर सबने जामवंत जी के साथ हनुमान जी की स्तुति की और याद दिलाया की उनका अवतार रामकाज के लिए ही हुआ है और वही लंका जाकर रामकार्य सिद्ध कर सकते हैं | हनुमान जी की शक्तियों को जगाने में जामवंत जी की अहम् भूमिका रही | 
 
नेशनल हाईवे-12 भोपाल-जबलपुर मार्ग पर रायसेन जिले के कस्बा बरेली से लगभग 15 किमी दूर स्थित ग्राम जामगढ़ के पास विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला की एक पहाड़ी में बनी गुफा महाभारत काल के कई प्रमाणों को समेटे है।

कहा जाता है कि इस गुफा में भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच लगातार 27 दिन तक युद्ध हुआ था। अपने ऊपर स्यमंतक मणि की चोरी का कलंक मिटाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने इसी गुफा में जामवंत से युद्ध किया था। धार्मिक ग्रंथ प्रेमसागर में इसका उल्लेख है। रीछराज जामवंत की गुफा में स्यमंतक मणि की चोरी का कलंक अपने सिर से मिटाने के लिए श्रीकृष्ण ने 27 दिनों तक युद्ध किया था।

गुफा के इतिहास को कुरेदने और किंवदंतियों की सचाई को जानने कई पुरातत्वविदों ने यहां और अध्ययन किया। फिलहाल देखरेख के अभाव में जामवंत की गुफा संकरी हो चुकी है। इस गुफा के आगे कई और छोटी गुफाएं हैं। इन गुफाओं की श्रृंखला प्राकृतिक शिव गुफा पर समाप्त होती है।

भागवत महापुराण में भी उल्लेख है कि 27 दिनों के युद्ध के बाद जामवंत ने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण के साथ कर दिया और स्यमंतक मणि उपहार में कृष्ण को दे दी। परशुराम और हनुमान के अलावा जामवंत भी ऐसे ही दिव्य पुरुष थे, जिन्होंने राम और कृष्ण, विष्णु के दोनों ही अवतारों के काल में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। समुद्र मंथन से लेकर कूर्म अवतार, वामन अवतार के समय भी जामवंत मौजूद थे। इसी वजह से जामवंत को सभी युगों में जीवित रहने वाले चिरंजीवियों में गिना जाता है।

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