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गुरुवार, 11 जून 2020

वानरवीर अंगद ( Vaanarveer Angad )

|| जय श्री राम || 

|| वानरवीर अंगद || 




अंगद बालि के पुत्र थे। बालि इनसे सर्वाधिक प्रेम करता था। ये परम बुद्धिमान, अपने पिता के समान बलशाली तथा भगवान श्रीराम के परम भक्त थे। अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी और सर्वस्व हरण करने के अपराध में भगवान श्रीराम के हाथों बालि की मृत्यु हुई। मरते समय बालि ने भगवान राम को ईश्वर के रूप में पहचाना और अपने पुत्र अंगद को उनके चरणों में सेवक के रूप में समर्पित कर दिया। प्रभु राम ने बालि की अन्तिम इच्छा का सम्मान करते हुए अंगद को स्वीकार किया। सुग्रीव को किष्किन्धा का राज्य मिला और अंगद युवराज बनाये गये। सुग्रीव के भाई बालि के पुत्र अंगद की माता का नाम तारा था जो एक अप्सरा थीं।जब प्रभु श्रीराम ने अंगद के पिता वानरराज बालि का वध कर दिया था तो बालि ने मरते वक्त अपने पुत्र को पास बुलाकर उसे ज्ञान की तीन बातें बताई थी। बालि ने कहा, पहली बात ध्यान रखना देश, काल और परिस्थितियों को हमेशा समझकर कार्य करना। दूसरी बात यह कि किसके साथ कब, कहां और कैसा व्यवहार करें, इसका सही निर्णय लेना।

Angad was the son of Bali. Bali loved them the most. He was supremely intelligent, as powerful as his father, and an ardent devotee of Lord Shri Ram. Bali died at the hands of Lord Shri Ram in the guilt of killing his younger brother Sugriva and all. While dying, Bali recognized Lord Rama as God and dedicated his son Angad as a servant at his feet. Lord Ram accepted Angad while respecting Bali's last wish. Sugriva got the kingdom of Kishkindha and Angad was made the crown prince. The mother of Angad, the son of Sugriva's brother Bali, was Tara who was an nymph. When Lord Sriram killed Angad's father Vanararaj Bali, Bali called his son near and told him three things of wisdom when he died. Bali said, the first thing to keep in mind is to always work by understanding the country, time and circumstances. The second is to make the right decision with whom, when, where and how to behave.


अंत में बालि ने तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात कही कि पसंद-नापसंद, सुख-दु:ख को सहन करना और क्षमाभाव के साथ जीवन व्यतीत करना। यही जीवन का सार है। बालि ने अपने पुत्र अंगद से ये बातें ध्यान रखते हुए कहा कि अब से तुम सुग्रीव के साथ रहो और हमेशा प्रभु श्रीराम की शरण में रहना वे त्रैलोक्यपति हैं। बालि के कहने पर ही अंगद ने सुग्रीव के साथ रहकर प्रभु श्रीराम की सेवा की। अंगद ने प्रभु श्री राम के द्वारा सौंपे गए उत्तरदायित्व को बखूबी संभाला। बालि वध के बाद सुग्रीव को किष्किन्धा का राज्य मिला और अंगद युवराज बनाए गए। सीता की खोज में वानरी सेना का नेतृत्व युवराज अंगद ने ही किया। सम्पाती से सीता के लंका में होने की बात जानकर अंगद समुद्र पार जाने के लिये तैयार हो गये, किन्तु दल का नेता होने के कारण जामवन्त ने इन्हें जाने नहीं दिया और हनुमान लंका गये।

In the end, Bali said the third most important thing is to like, dislike, tolerate happiness and sorrow and lead a life of forgiveness. This is the essence of life. Bali said this to his son Angad, keeping in mind that from now on you stay with Sugriva and always remain in the shelter of Lord Shri Ram, he is the Trilokyapati. Angad served Lord Shree Ram by staying with Sugriva at the behest of Bali.After the Bali slaughter Sugriva got the kingdom of Kishkindha and Angad was made the crown prince. Yuvraj Angad led the forestry army in search of Sita. Knowing that Sita was in Lanka from Sampathi, Angad agreed to go across the sea, but being the leader of the party, Jamwant did not let him go and Hanuman went to Lanka.
 
 
हनुमान, अंगद और जामवंत जैसे कई विद्वान प्राण विद्या में पारंगत थे। राम ने अंगद से कहा कि हे अंगद! रावण के द्वार जाओ। कुछ सुलह हो जाए, उनके और हमारे विचारों में एकता आ जाए, जाओ तुम उनको शिक्षा दो। 

Many scholars like Hanuman, Angad and Jamwant were proficient in Pran Vidya. Ram said to Angad, O Angad! Go to Ravana's door. Let there be some reconciliation, there should be unity between them and our thoughts, go teach them.

जब अंगद रावण की सभा में पहुंचे तो वहां नाना प्रकार के वैज्ञानिक भी विराजमान थे, वण और उनके सभी पुत्र विराजमान थे। रावण ने कहा कि आओ! तुम्हारा आगमन कैसे हुआ? अंगद ने कहा कि प्रभु मैं इसलिए आया हूं कि राम और तुम्हारे दोनों के विचारों में एकता आ जाए। तुम्हारे यहां संस्कृति के प्रसार में अभाव आ गया है, अब मैं उस अभाव को शांत करने आया हूं। चरित्र की स्थापना करना राजा का कर्त्तव्य होता है, तुम्हारे राष्ट्र में चरित्र हीनता आ गई है, तुम्हारा राष्ट्र उत्तम प्रतीत नहीं हो रहा है इसलिए मैं आज यहां आया हूं। रावण ने कहा कि यह तो तुम्हारा विचार यथार्थ है परन्तु मेरे यहां क्या सूक्ष्मता है?अंगद वहां श्रीराम का संदेश लेकर राजदूत बनकर जाते हैं लेकिन जब रावण उन्‍हें बैठने के लिए आसन नहीं देता है तो वे स्‍वयं की पूंछ का आकार बढ़ाकर उसी का आसन बनाकर वहीं बैठ जाते हैं। यह आसन रावण के आसन से भी ऊंचा होता है। यह देख रावण सहित समस्‍त असुर हतप्रभ रह जाते हैं।

When Angad reached the assembly of Ravana, there were many types of scientists sitting there, Vana and all his sons were sitting. Ravana said come! How did you arrive Angad said that Lord I have come so that the thoughts of both Rama and you may come together. There has been a lack of spread of culture here, now I have come to calm that deficiency.Ravana said that this is your idea of ​​reality but what is fine with me? Angad goes there as an ambassador with the message of Shri Ram, but when Ravana does not give him the seat to sit, he increases the size of his tail and makes it his own posture. Sit there. This posture is also higher than the posture of Ravana. Seeing this, all the demons including Ravana are shocked.
 
अब अंगद बोले तुम्हारे यहां चरित्र की सूक्ष्मता है। राजा के राष्ट्र में जब चरित्र नहीं होता तो संस्कृति का विनाश हो जाता है। संस्कृति का विनाश नहीं होना चाहिए, संस्कृति का उत्थान करना है। संस्कृति यही कहती है कि मानव के आचार व्यव्हार को सुन्दर बनाया जाए, महत्ता में लाया जाए, एक दूसरे की पुत्री की रक्षा होनी चाहिए। वह राजा के राष्ट्र की पद्धति कहलाती है।

Now Angad said, you have a subtlety of character here. When there is no character in the king's nation, the culture is destroyed. Culture should not be destroyed, culture has to be uplifted. Culture says that the behavior of human beings should be made beautiful, brought in importance, each other's daughter should be protected. He called the nation down the king.
 
रावण ने पूछा क्या मेरे राष्ट्र में विज्ञान नहीं? अंगद बोले कि हे रावण! तुम्हारे राष्ट्र में विज्ञान है परन्तु विज्ञान का क्या बनता है? एक मंगल की यात्रा कर रहा है परन्तु मंगल की यात्रा का क्या बनेगा, जब तुम्हारे राष्ट्र में अग्निकांड हो रहे हैं। हे रावण! तुम सूर्य मंडल की यात्रा कर रहे हो, उस सूर्य की यात्रा करने से क्या बनेगा, जब तुम्हारे राष्ट्र में एक कन्या का जीवन सुरक्षित नहीं। तुम्हारे राष्ट्र का क्या बनेगा?

Ravana asked, Is there no science in my nation? Angad said that O Ravan! There is science in your nation, but what is made of science? One is traveling to Mars, but what will become of the journey to Mars, when there are fireballs in your nation. Hey Ravana! You are traveling to the solar system, what will happen when you travel to that sun, when a girl's life is not safe in your nation. What will happen to your nation?
 
रावण ने कहा कि यह तुम क्या उच्चारण कर रहे हो, तुम अपने पिता की परंपरा शांत कर गए हो। अंगद ने कहा कदापि नहीं, में इसलिए आया हूं कि तुम्हारे राष्ट्र और अयोध्या दोनों का समन्वय हो जाए।

Ravana said what are you saying, you have calmed down your father's tradition. Angad said, no, I have come so that both your nation and Ayodhya can be coordinated.
 
इस पर रावण मौन हो गया। नरायान्तक बोले कि भगवन! इसको विचारा जाए, यह दूत है, यह क्या कहता है? अंगद बोले यदि भगवन! राम से तुम अपने विचारों का समन्वय कर लोगे तो राम माता सीता को लेकर चले जाएंगे।

Ravan became silent on this. Narayanatak said that God! Consider it, this is the messenger, what does it say? Angad said if God If you coordinate your thoughts with Rama, then Rama will go with Mother Sita.
 
रावण ने कहा कि यह क्या उच्चारण कर रहा है? मैं धृष्ट नहीं हूं। अंगद बोले यही धृष्टता है संसार में, किसी दूसरे की कन्या को हरण करके लाना एक महान धृष्टता है। तुम्हारी यह धृष्टता है कि राजा होकर भी परस्त्रीगामी बन गए हो। जो राजा किसी स्त्री का अपमान करता है उस राजा के राष्ट्र में अग्निकाण्ड हो जाते हैं।

Ravana said what is it chanting? I am not reckless. Angad said that this is the audacity in the world, it is a great audacity to take away another girl. It is your audacity that even after being a king, you have become transcendental. The king who insults a woman gets set on fire in that king's nation.
 
रावण ने कहा कि यह कटु उच्चारण कर रहा है। अंगद ने कहा कि मैं तुम्हें प्राण की एक क्रिया निश्चित कर रहा हूं, यदि चरित्र की उज्ज्वलता है तो मेरा यह पग है इस पग को यदि तुम एक क्षण भी अपने स्थान से दूर कर दोगे तो मैं उस समय में माता सीता को त्याग करके राम को अयोध्या ले जाऊंगा। अंगद ने प्राण की क्रिया की और उनका शरीर विशाल एवं बलिष्‍ठ बन गया।
Ravana said that it is bitter. Angad said that I am making you an action of life, if there is a brightness of the character, this is my foot, if you remove this step from your place even for a moment, then I will abandon Mother Sita in that time Ram Will take you to Ayodhya Angad performed the life of Pran and his body became huge and athletic.
 
राजसभा में कोई ऐसा बलिष्ठ नहीं था जो उसके पग को एक क्षण भर भी अपनी स्थिति से दूर कर सके। अंगद का पग जब एक क्षण भर दूर नहीं हुआ तो रावण उस समय स्वतः चला परन्तु रावण के आते ही उन्होंने कहा कि यह अधिराज है, अधिराजों से पग उठवाना सुन्दर नहीं है। उन्होंने अपने पग को अपनी स्थली में नियुक्त कर दिया और कहा कि हे रावण! तुम्हें मेरे चरणों को स्पर्श करना निरर्थक है। यदि तुम राम के चरणों को स्पर्श करो तो तुम्हारा कल्याण हो सकता है। रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया।

There was no sacrifice in the Rajya Sabha that could take away his foot from his position even for a moment. When Angad's foot did not go away for a moment, Ravana went on his own at that time, but as soon as Ravana came, he said that it is the sovereign, it is not beautiful to take the steps from the authorities. He appointed his foot in his place and said, O Ravana! It is useless for you to touch my feet. If you touch the feet of Rama, you can be benefited. Ravana sat silently at his place.

गुरुवार, 21 मई 2020

राम राम जी ( Rama - The God of peace & dignity )

|| जय श्रीराम || 

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ||
 
 
 
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्‌॥1॥

भावार्थ:-शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देने वाले, ब्रह्मा, शम्भु और शेषजी से निरंतर सेवित, वेदान्त के द्वारा जानने योग्य, सर्वव्यापक, देवताओं में सबसे बड़े, माया से मनुष्य रूप में दिखने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, करुणा की खान, रघुकुल में श्रेष्ठ तथा राजाओं के शिरोमणि राम कहलाने वाले जगदीश्वर की मैं वंदना करता हूँ॥1॥


Meaning: - Shanta, Sanatana, Irrepressible (beyond proofs), sinless, salvation-giving peace, serving continuously from Brahma, Shambhu and Sheshaji, knowable by Vedanta, omnipresent, the greatest of gods, appearing in human form from Maya , Who defeats all sins, mine of compassion, I praise the Jagadishwar, who is exalted in Raghukul and is called Shiromani Ram of kings.

पतित पावन सीताराम अर्थात पापियों को भी पवित्र करने वाली कथा है भगवान् राम की रामायण जिसमे मर्यादा पुरषोत्तम राम और उनकी पत्नी जनक पुत्री जानकी अर्थात सीता जी ने संसार को धर्म के मार्ग पर चलते हुए जीवन जीना सिखाया है |

 The story of the Purifier Sitaram, that purifies even sinners, is the Ramayana of Lord Rama, in which Maryada Purushottam Ram and his wife Janaka's daughter Janaki means Sita Ji have taught the world to live on the path of religion.
 
राम दुनिया का एक मात्र नाम जिसे सुनते ही मन को मिलता है विश्राम | यह नाम मात्र एक शब्द नहीं बल्कि येह अपने आप मैं एक मंत्र है जिसका जाप सदाशिव भोले शंकर सहित ब्रह्माण्ड के सभी सत्संगी साधुओं, देवी -देवताओं , नर -नारी यहाँ तक की पशु-पक्षियों ने भी  किया है | राम का अर्थ है प्रकाश या तेज़ (भीतर का प्रकाश) | 'रा ' का अर्थ आभा या कान्ति है और 'म' का अर्थ है मैं या स्वयं | 'ॐ ' का अर्थ बहना या विस्तार होना है | ओंकार ध्वनि के १०० से अधिक अर्थ हैं | 'ॐ राम' का अर्थ है खुद के तेज का विस्तार |'ॐ राम" परस्पर जुड़ते हैं तो अपने आपमें आध्यात्मिकता की ऊचाइयों  और भक्ति की गहराईयों को छूने में सक्षम हैं | इसलिए भगवान शिव के लिए राम पूज्यनीय थे और भगवान् राम के लिए महादेव भोले शंकर |

Ram is the only name of the world that the mind gets rest on hearing. This name is not just a word but it is a mantra in its own right, which is chanted by Sadashiv Bhole Shankar, all the satsangi sadhus, goddesses, gods and goddesses and even birds and animals. Rama means light or fast (inner light). 'Ra' means Aura or Kanti and 'M' means I or myself. 'ॐ' means to flow or expand. Omkar sound has more than 100 meanings. 'ॐ Rama' means the expansion of one's own glory. "ॐ Rama" is able to touch the heights of spirituality and the depths of devotion in themselves. So Rama was revered for Lord Shiva and Mahadev for Lord Rama. Bhole Shankar

राम कथा में दर्शाया गया है की कैसे एक साधारण मनुष्य भी मर्यादा का पालन करते हुए देवताओं के समान पूजनीय हो जाता है | भगवान् राम ने अनेक कष्टों का दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए हम साधारण लोगो को असाधारण उदाहरण दिए ताकि हम भी उनकी भांति अपने दुखो का सामना करते हुए और मुस्कुराते हुए इस भवसागर को पार पा सके | 
 
Ram Katha depicts how an ordinary person also worships dignity and becomes revered like the gods. Lord Rama faced many sufferings strongly and gave extraordinary examples to ordinary people so that we, like him, could overcome this bhavasagar while facing our sufferings and smiling.
 
 
राम कथा अनेक प्रकार से अनेक महात्माओं ने व् लोगो ने लिखी, कही और सुनी | ऐसा क्या है इनकी कथा में की युगो से चलती आ रही इस कथा को आज भी लोग ह्रदय  से लगा कर सुनते है , ऐसा क्यों है की अनेक हिन्दू देवी देवताओं के मध्य में केवल श्री राम की कथा ही सबसे अधिक लोकप्रिय है | कदापि इसकी वजह यह तो नहीं  की हम आज भी  खुद को  श्री राम जी  की कथा से जोड़कर  देखते हैं , क्यूंकि उन्होंने भगवान होते  हुए भी साधारण मनुषय की भांति अनेक दुखो के होते हुए भी मर्यादा मैं जीवन जिया |   
 
Ram Katha was written and said and heard by many Mahatmas in many ways. What is it that in this story, people continue to listen to this story going on from Yugo even today, why is it that the story of Shri Ram is the most popular among many Hindu deities. May it not be the reason that even today, we see ourselves associated with the story of Shri Ram ji, because he, despite being God, lived life in dignity in spite of many sorrows like ordinary humans.
 
राम नाम शांति ही नहीं शक्ति का भी प्रतीक है क्यूंकि यह नाम पत्थरो को भी पानी मैं तैरा देता  है | वीर हनुमान इन्हीं  का नाम ले के ही समुन्द्र लाँघ गए | जिनके चरण छूते ही एक पत्थर देवी अहिल्या बन स्वर्ग चली गयी , जिनके वन मैं जाते ही  दशरथ जी  के प्राण ही  छूट गए और भी कई  उदाहरण हैं जो राम नाम की महिमा का बखान करते है| इसी से जुडी एक रोचक कथा का वर्णन करते हुए हर्ष होता है :-
 
The name Ram is not only a symbol of peace but also of power because this name also swims in stones in water. Veer Hanuman went to the sea after taking his name only. On touching whose feet, a stone became Goddess Ahilya and went to heaven, as soon as I went to the forest, I lost the life of Dasharatha ji and there are many examples which speak of the glory of Rama's name. It is delightful to describe an interesting story related to this: -
 
एक गुरु युवा बालकों के एक समूह को विष्णु सहस्त्रनाम सिखा रहे थे। गुरु ने श्लोक दोहराया:

सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
फिर उन्होंने लड़कों से कहा, अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।

उनमें से एक लड़का अध्यापक से सहमत नहीं था। उसने शिक्षक से प्रशन किया, गुरूजी! ३ बार = १००० बार कैसे हो सकता है? मुझे इसका तर्क समझ में नहीं आया। ३ नाम = १००० नाम कैसे?

A guru was teaching Vishnu Sahasranama to a group of young boys. The Guru repeated the verse:
Shri Ram Ram Rameti Ramay Ramay Manorama.
Sahasranama Tattulya Ramnam Varanane॥

Then he told the boys, if you chant the name of Rama thrice, it is equivalent to chanting the complete Vishnu Sahastranam or the name of God 1000 times. One of the boys did not agree with the teacher. He questioned the teacher, Master! How can 3 times = 1000 times? I do not understand the logic of this. 3 names = 1000 names how?

ज्ञानी तथा निपुण गुरु, जो भगवान राम के एक महान भक्त थे, ने अति सरलता से समझाया, भगवान शिव कहतें हैं कि भगवान राम का नाम सभी शब्दों से अधिक मधुर है और इस नाम का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु के १००० नामों के जाप के समतुल्य है।

The learned and accomplished guru, who was a great devotee of Lord Rama, explained very simply, Lord Shiva says that Lord Rama's name is more melodious than all words and the chanting of this name, the complete Vishnu Sahastranama or 1000 names of Vishnu. Is equivalent to chanting.

इस बात की पुष्टि करने के लिए कि ३ बार राम नाम का जाप = १००० बार या सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम के जाप के बराबर है, यहाँ एक दिलचस्प संख्यात्मक गणना है-
राम के नाम में संस्कृत के दो अक्षर हैं- र एवं म

To confirm that 3 times the name of Rama is equal to 1000 times or the entire Vishnu Sahasranama recitation, here is an interesting numerical calculation- Ram has two Sanskrit letters in his name - R and M

र (संस्कृत का द्वितीय व्यंजन : य, र, ल, व, स, श)
म (संस्कृत का पाँचवा व्यंजन : प, फ, ब, भ, म)
र और म के स्थान पर २ तथा ५ रखने से राम = २* ५= १०
अतः तीन बार राम राम राम बोलना = २ * ५* २* ५* २* ५ = १० * १० * १० = १०००
इस प्रकार ३ बार राम नाम का जाप १००० बार के बराबर है।

R (Second consonant of Sanskrit: Y, R, L, V, S, SH) M (fifth Sanskrit consonant: p, f, b, b, m) By placing 2 and 5 in place of R and M, Ram = 2 * 5 = 10 So three times Ram Ram Ram speak = 2 * 5 * 2 * 5 * 2 * 5 = 10 * 10 * 10 = 1000 Thus chanting of Ram Naam 3 times is equal to 1000 times


बालक इस उत्तर से प्रसन्न हुआ और उसने पूरी एकाग्रता और निष्ठा से विष्णुसहस्त्रनाम सिखना शुरू कर दिया।

The child was pleased with this answer and started learning Vishnushastranama with full concentration and devotion.
 
राम जी सदियों से भारतवर्ष तथा हिन्दुओं के आदर्श नायक रहें हैं और सदा रहेंगे| पिछले कुछ समय से लोग नए नए प्रेरक वक्ता तथा प्रेरक कथा कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जबकि भगवान् राम जैसा प्रेरक तो किसी से भी अछुता नहीं | जीवन के हर पहलु को भगवान् राम ने आदर्श रूप में खुद जिया तथा हम लोगो के लिए उत्कृष्ट उदहारण बने | जीवन के उतार चढ़ाव को निष्काम भाव से जीना प्रभु राम से अच्छा कौन सीखा सकता है | कभी सुख में बहुत खुश नहीं होना चाहिए ना ही दुःख के समय खुद का संयम खोना चाहिए ऐसा जीवन जी  भगवान राम ने हम लोगो के लिए आदर्श स्थापित किये | राजा बनते बनते एक राजकुमार को वनवासी बना दिया गया किन्तु भगवान् राम बोले मुझे तो तीनो लोको का राजा बना दिया मेरे माता पिता ने , भाई भरत के प्रेम को सर्वोपरि मानते हुए भगवान् राम ने राज्य स्वीकार तो किया किन्तु कहा की पिता का वचन झूठा ना हो इसलिए राजकाज तुम ही देखो  और खुद १२ वर्ष तक वन में कंद मूल खाते रहे , पत्नी का हरण हुआ फिर भी संयम ना खोया पहले सुग्रीव से मित्रता निभाते हुए उसे उसकी पत्नी दिलवाई फिर अपनी मदद करने की याद दिलाई, समुद्र को एक बाण से सूखा सकते थे किन्तु तीन दिन तक उसे पूजा पाठ से मनाते रहे , खुद नंगे पैर थे पर विभीषण को लंका का राजा क्षण भर में बना दिया , मेघनाद जिसने उन्हे नागपाश में बांधा तथा लक्ष्मण को मूर्छित किया उसके शव को सम्मान के साथ लंका भिजवा दिया, महाकपटी रावण को मारा पर मृत्युशैया पर बैठे रावण का  निरादर नहीं किया अंतिम समय भी लक्षमण जी को रावण का मान रखने के लिए उसके पास राजनीती सीखने भेज दिया विकट परिस्थितियों में भी अपना संयम ना खोकर ही राम जी मर्यादापुर्षोत्तम कहलाये | 
 
Ram Ji has been the ideal hero of India and Hindus for centuries and will always be. People have been getting attracted to new inspirational speakers and inspiring stories from the past few times, whereas motivators like Lord Ram are not untouched by anyone. Lord Ram himself lived every aspect of life in the ideal form and we became excellent examples for people.Who can teach life to the ups and downs of life better than Lord Rama? One should never be very happy in happiness, nor should we lose our self-control in times of grief, Lord Ram set such a life for us.On becoming a king, a prince was made a forest dweller, but Lord Ram said that he has made me the king of all the three locos. My parents, considering the love of brother Bharat as paramount, Lord Ram accepted the kingdom but said that the father's word is not false So you look at the kingdom and keep eating tuber root in the forest for 12 years itself, wife is not lost, yet lost control, first befriended Sugriva and reminded him to help his wife, and then help her,You could dry the sea with an arrow, but for three days kept him from worshiping him, he himself was barefoot, but made Vibhishana the king of Lanka in a moment, Meghnad who tied him in Nagpash and made Lakshman to honor his dead body. Sent Lankan with, Mahakapati killed Ravan but did not disrespect Ravana sitting on the mortuary, even at the last time, Laxman ji was sent to him to learn politics by keeping him in the form of Ravana, in spite of not losing his restraint even under difficult circumstances, Ram ji was called Maryadapurshottam.

 
भगवान् राम ने यह धर्मयुद्ध केवल अपनीं पत्नी के लिए नहीं बल्कि संसार की सभी नारियों के सम्मान के लिए लड़ा ताकि रावण का उदाहरण देकर दुष्टों को अपने पापों के लिए सचेत किया जा सके |
 
Lord Rama fought this crusade not only for his wife but for the honor of all the women of the world so that by giving the example of Ravana, the wicked could be warned of their sins.

                    Link: https://youtu.be/6KejDHNefiM